Sunday, 27 September 2015

अब तीसरी संतान पर भी पदोन्नति पर मिल सकता है लाभ

राज्य सरकार दो बच्चों से ज्यादा संतान होने पर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति नहीं दिए जाने के लागू अपने नियमों में बदलाव कर सकती है। बदलाव को लेकर सरकार के उच्चस्तर पर कवायद जारी है। सरकार ने विधायकों और अन्य संगठनों की मांग पर करीब दर्जन भर राज्यों से कार्मिकों के लिए लागू इस तरह के नियमों को लेकर रिपोर्ट मंगवाई है। राज्यों से मिली रिपोर्ट में कहीं भी एेसा नियम सामने नहीं आया है। इस नियम में बदलाव के बाद प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। प्रदेश में करीब छह हजार कर्मचारी और अधिकारी तीसरी संतान के बाद पदोन्नति नहीं मिलने के नियम के चलते लाभों से वंचित हैं।
इन राज्यों से ली जानकारी
राज्य सरकार ने बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, झारखंड, हरियाणा और पंजाब से राज्य कर्मचारियों को दो संतान से ज्यादा होने पर पदोन्नति संबंधी रिपोर्ट मंगवाई है। इन राज्यों में से किसी में भी इस तरह का नियम लागू नहीं है। हालांकि मध्यप्रदेश में १ जनवरी, २००२ के बाद तीसरी संतान होने पर नौकरी के लिए पात्र नहीं मानने का नियम लागू है।
इन्होंने लिखे पत्र
इस नियम को बदलने के लिए राज्य सरकार के तीन मंत्रियों, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी सहित दर्जन भर विधायकों ने भी दबाव बनाया हुआ है। मुख्यमंत्री के स्तर पर इस नियम की पुनर्समीक्षा के निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र लिखने वालांे में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, वन एवं पर्यावरण मंत्री राजकुमार रिणवां, देवस्थान विभाग मंत्री ओटाराम देवासी और मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर शामिल हैं।
हो रही है पुनर्समीक्षा
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले में सीएम वसुंधरा राजे को पत्र लिख कर नियम की पुनर्समीक्षा के लिए लिखा गया है। राज्य में 1 जून, 2006 के बाद दो बच्चों से ज्यादा संतान होने पर वित्तीय लाभ और पदोन्नति दोनों पर रोक के प्रावधान है। इसे लेकर कार्मिक और वित्त विभाग दोनों ने अलग-अलग आदेश जारी किए हुए हैं। उच्च सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार ने प्रमोशन के इस नियम हटाने को लेकर मानस बना लिया है।
पीएम कार्यालय से आया पत्र
पीएमओ से २२ अप्रैल, २०१५ को सीएमओ को इस मामले में पत्र लिखा गया है। एेसा ही एक पत्र भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कार्यालय से मिले निर्देश के बाद केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने सीएमओ को लिखा है।
विधायकों का तर्क
विधायकों का तर्क है कि इस नियम के चलते कन्या भू्रण हत्या जैसे मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके चलते कर्मचारियों और अधिकारियों को तिहरे दंड भुगतने पड़ रहे हैं। राज्य में नियुक्ति केन्द्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एेसा कोई नियम लागू नहीं है।

दो से अधिक संतान पर सरकारी नौकरी व पदोन्नति रुकने के प्रदेशभर में पांच से छह हजार मामले लंबित हैं। सरकार का यह प्रयास कर्मचाारियों के हित में है।
विपिन प्रकाश शर्मा , जिला महा मन्त्री राजस्थान राज्य सयुंक्त कर्मचारी महासंघ (एकीकृत)

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